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क्या है पिंक बॉल क्रिकेट? What is Pink Ball Cricket

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क्रिकेट बल्ले और गेंद का खेल है। क्रिकेट में बल्ले को लेकर तो कोई ख़ास झमेला नहीं है, पर गेंद को लेकर यहाँ थोड़ी पेचीदगी दिखाई पड़ती है। रंगों के सन्दर्भ में कुछ समय पहले तक क्रिकेट में दो तरह की गेंदों का ही प्रचलन था, लेकिन अब क्रिकेट तीन तरह की गेंदों से खेला जाता है- सफ़ेद गेंद (white ball), लाल गेंद (Red ball) और गुलाबी गेंद (Pink ball). गौरतलब है कि सफ़ेद गेंद से T-20 और वन डे क्रिकेट खेला जाता है और लाल गेंद से टेस्ट क्रिकेट खेला जाता है। अब इस कड़ी में गुलाबी गेंद यानि Pink ball cricket की एंट्री हो गई है।

इसके बारे में जानने से पहले गुलाबी गेंद अर्थात् Pink ball cricket के इतिहास को जान लिया जाय।

क्या है गुलाबी गेंद (Pink ball) का इतिहास?

क्रिकेट की दुनिया में अब तक सफ़ेद और लाल गेंद ही चलन में थी। पर, 2000 के आसपास जब टेस्ट क्रिकेट को दर्शकों के बीच और भी लोकप्रिय बनाए जाने की चर्चा शुरू हुई तब यही बात सामने आई कि दर्शक ज़्यादातर शाम के समय में क्रिकेट देखना पसंद करते हैं। पर, टेस्ट मैच तो दिन में खेले जाते हैं। इसी सन्दर्भ में टेस्ट मैच को भी डे-नाईट मॉड में आयोजित कराने की चर्चा शुरू हुई, जिससे ज्यादा से ज्यादा दर्शक टेस्ट मैच को देखने के लिए आ सकें।

इसी बीच, कई क्रिकेटरों और क्रिकेट के जानकारों की तरफ से इसको लेकर विपरीत प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। उनका तर्क था कि टेस्ट क्रिकेट के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जाय। इन लोगों की चिंता मुख्यतः इस बात की ओर थी कि पैसे कमाने के लिए टेस्ट क्रिकेट के साथ ज्यादा तोड़-मरोड़ न किया जाय।

पर, अधिकांश लोगों ने डे-नाईट टेस्ट क्रिकेट मैच को लेकर उत्सुकता दिखाई। इसमें सभी क्रिकेट बोर्ड का आर्थिक हित भी शामिल था। पर, यहाँ एक दिक्कत यह थी कि रात में फ्लड लाइट के बीच लाल गेंद यानि red ball आसानी से बल्लेबाजों को देखने में नहीं आती थी। यही कारण है कि डे-नाईट टेस्ट क्रिकेट के लिए रिसर्चर्स ने इस पर काम करना शुरू किया। इसके बाद इनलोगों की तरफ से सुझाव आया कि गुलाबी गेंद यानि Pink ball के साथ डे-नाईट टेस्ट खेला जा सकता है। लाल गेंद की तुलना में फ्लड लाइट के अन्दर पिंक बॉल की दृश्यता ज्यादा थी।

Pink Ball

इसी बीच इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड की तरफ से इस बात की घोषणा की गई कि 2010 में बांग्लादेश के बीच होने वाले लॉर्ड्स टेस्ट को गुलाबी गेंद के साथ डे-नाईट मॉड में खेला जाएगा। लेकिन, इसे लेकर कुछ विरोध सामने आए तो बात नहीं बन पाई।

        

…और इस प्रकार से हुआ क्रिकेट में गुलाबी गेंद का पदार्पण

 

इंग्लैंड और बांग्लादेश के बीच होने वाले डे-नाईट टेस्ट मैच का आईडिया ड्राप होने के बाद 2009 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के महिला क्रिकेट टीमों के बीच गुलाबी गेंद से डे-नाईट वन डे मैच खेला गया। इसके बाद और भी कुछ-कुछ देशों में क्लब स्तर पर गुलाबी गेंद को प्रयोग में लाया गया। जहाँ तक इंटरनेशनल क्रिकेट में डे-नाईट टेस्ट मैच में गुलाबी गेंद के प्रयोग की बात है तो इसकी शुरुआत 27 नवंबर, 2015 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच एडिलेड, ओवल में हुई। जबकि गुलाबी गेंद से डे-नाईट का दूसरा टेस्ट मैच पाकिस्तान और वेस्ट इंडीज के बीच दुबई में 2016 में खेला गया।

जहाँ तक भारत की बात है, भारत ने गुलाबी गेंद से अपना पहला डे-नाईट मैच 2019 में बांग्लादेश के साथ कलकत्ता के इडेन गार्डन में खेला।

गुलाबी गेंद की क्या है खासियत?

गुलाबी गेंद (Pink ball) का इस्तेमाल आम तौर पर डे-नाईट टेस्ट मैच के दौरान किया जाता है। यही कारण है कि इसे पिंक बॉल क्रिकेट के नाम से भी जाना जाता है। डे-नाईट टेस्ट क्रिकेट में गुलाबी गेंद के प्रयोग का सबसे बड़ा कारण यह है कि लाल गेंद की तुलना में यह गेंद फ्लड लाइट के अन्दर बल्लेबाजों को ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखलाई पड़ती है।

गुलाबी गेंद में लाल गेंद (Red ball) की तुलना में उजले सीम (seam) की जगह काले सीम (seam) का इस्तेमाल किया जाता है। हालाँकि, शुरुआत में गुलाबी गेंद में भी उजले सीम का ही प्रयोग किया जाता था, पर बाद में इसमें काले सीम का प्रयोग किया जाने लगा। इस सन्दर्भ में आप आर्टिकल भी पढ़ सकते हैं जो कि इंडिया टुडे द्वारा लिखा गया है जिसमें गुलाबी गेंद और लाल गेंद में अंदर को स्पष्ट किया गया है.

पिंक बॉल रेड बॉल की तुलना में ज्यादा स्विंग करती है और इसके साथ ही पिच पर पड़ने के बाद यह अधिक तेज़ गति और उछाल के साथ बल्लेबाज की तरफ आती है। यही कारण है कि क्रिकेट एक्सपर्ट का मानना है कि पिंक बॉल से खेलने के लिए बल्लेबाजों को अधिक सतर्क और तैयार रहने की ज़रूरत है। उन्हें अपने फूट-वर्क को तेज़ करना होता है। पिंक बॉल में बल्लेबाजों के पास प्रतिक्रिया के लिए बहुत कम समय होता है। पिंक बॉल से कुल अब तक कुल 20 डे-नाईट टेस्ट मैच खेले जा चुके हैं, जिसमें एक रोचक बात यह है कि इसमें से एक भी मैच ड्रा नहीं रहा है।

अभी हाल ही में एडिलेड में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाला दूसरा टेस्ट मैच पिंक बॉल से ही खेला जा रहा है। पिंक बॉल से डे-नाईट टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया टीम का दबदबा माना जाता है। पिंक बॉल से अब तक खेले गए कुल 12 डे-नाईट टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलिया ने 11 मैच जीते हैं। वहीं, भारत ने अब तक 4 मैचों में से 3 मैचों में जीत दर्ज की है।

6 दिसंबर से हो रहे ऑस्ट्रेलिया और इंडिया के बीच डे-नाईट पिंक बॉल टेस्ट पर सभी की निगाहें जमी हुई हैं। हालांकि, दूसरे दिन के खेल की समाप्ति तक ऐसा लग रहा है कि ऑस्ट्रेलिया इस मैच में भारत पर हावी हो गई है। लेकिन, मैच जब तक ख़त्म नहीं हो जाता तब तक कुछ कहा नहीं जा सकता।

 

 


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