भारत के पहले दलित क्रिकेटर बालू पालवंकर की कहानी बताती है कि कैसे एक सड़ी मछली पूरे तालाब को गन्दा कर देती है।
यहाँ इस सड़ी हुई मछली का नाम है- ‘जातिवाद’। कहने को आप वर्ण-व्यवस्था भी कह सकते हैं। भारत में जातिभेद और जातिवाद का बहुत पुराना इतिहास रहा है। जातिवाद का यह असर भारतीय समाज के हर क्षेत्र में देखने को मिलता है। फुले, आम्बेडकर, पेरियार और गाँधी जैसे लोगों तथा अन्य कई व्यक्तियों और समूहों…
