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वैभव सूर्यवंशी – Vaibhav Suryavanshi

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2025 का IPL शुरू होने से पहले ही बिहार के Vaibhav Suryavanshi ने महफ़िल लूट ली है। मुद्दे की बात यह है कि इन्हें Rajasthan Royals ने 1.10 करोड़ में खरीद कर इन्हें अपनी टीम का हिस्सा बना लिया है। वैभव IPL-2025 के ऑक्शन में 30 लाख के बेस प्राइस के साथ शामिल हुए। राजस्थान रॉयल्स की टीम में शामिल होते ही वैभव ने ये दो बड़े रिकॉर्ड्स बना लिए हैं-

IPL के 16 वर्षों के इतिहास में नया चैप्टर जोड़ा बिहार के 13 वर्षीय क्रिकेटर ने

  • IPL के 16 वर्षों के इतिहास में इन्होंने सबसे कम उम्र यानि 13 साल 243 दिन में IPL शामिल होने का रिकॉर्ड बना लिया है।
  • बिहार से आने वाले क्रिकेटरों में IPL में शामिल होने वाला सबसे कम उम्र का क्रिकेटर

वैभव सूर्यवंशी

IPL में शामिल होने से पहले भी वैभव ने कई बड़े कारनामें किए हैं और कई बड़े रिकॉर्ड्स भी बनाए हैं

  • कुछ ही दिनों पहले वैभव ने क्रिकेट के 170 वर्षों के इतिहास में सबसे कम उम्र में शतक बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। इन्होंने 1ST YOUTH TEST FOR INDIA U-19 में ऑस्ट्रेलिया U-19 के खिलाफ खेले गए मैच में 62 गेंदों में 104 रनों की पारी खेली जिसमें 14 चौके और 4 छक्के शामिल थे।
  • इससे पहले वैभव ने रणजी ट्रॉफी के इतिहास में भी सबसे कम उम्र यानि 12 वर्ष 284 दिन में डेब्यू करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया।
  • ऐसा करते हुए वैभव ने भारतीय टीम के महानतम बल्लेबाजों सचिन तेंदुलकर और युवराज सिंह का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

vaibhav suryavanshi

कौन हैं वैभव सूर्यवंशी – Vaibhav Suryavanshi?

ये बिहार के समस्तीपुर जिले के  ताजपुर गांव के रहने वाले हैं। 2011 में पैदा हुए और महज 4 वर्ष की अवस्था से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। ये बाएँ हाथ के बल्लेबाज हैं और साथ में स्पिन गेंदबाजी भी करते हैं। इनके पिता का नाम है संजीव सूर्यवंशी, जो कि किसानी करते हैं। लोग खेत बेच कर अपने बच्चों को इंजीनियर, डॉक्टर और आईएएस बनाते हैं, इनके पिता ने खेत बेच कर अपने बेटे को क्रिकेटर बनाया है। बिहार जैसे पिछड़े राज्य में यह किसी मिशाल से कम नहीं है।

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए अपने बयां में वैभव ने कहा, “दो साल छह महीने प्रैक्टिस करने के बाद, मैंने विजय मर्चेंट ट्रॉफी के लिए अंडर-16 ट्रायल दिया।”

“मेरी उम्र के कारण मैं स्टैंडबाय पर था। लेकिन भगवान की कृपा से मुझे रणजी खिलाड़ी रहे मनीष ओझा सर के साथ कोचिंग करने का मौका मिला। आज मैं जो कुछ भी हूं, उन्हीं की बदौलत हूं।”


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