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क्रिकेट स्टेडियम में “अल्लाहु अकबर” के नारे : खेल में साम्प्रदायिकता की घुसपैठ का एक और उदाहरण

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साम्प्रदायिक उन्माद का ज़हर अच्छे-अच्छे को बीमार बना देता है

दुबई में 8 दिसम्बर को भारत और बांग्लादेश की U-19 टीम के बीच खेले गए एशिया कप के फाइनल क्रिकेट मैच में बांग्लादेशी क्रिकेट फैन्स और बांग्लादेश टीम के कप्तान Azizul Hakim Tamim ने क्रिकेट को शर्मसार करने का काम किया। मैच समाप्ति की ओर था। बांग्लादेश की जीत लगभग तय थी। भारतीय टीम के 9 विकेट गिर चुके थे। क्रीज पर भारत की आख़िरी बैटिंग जोड़ी औपचारिकता निभाने के लिए खड़ी थी। बांग्लादेशी क्रिकेट फैन्स उत्साहित थे। उत्साह में वे “अल्लाहु-अकबर, अल्लाहु-अकबर” के नारे लगा रहे थे। पूरा स्टेडियम इसी नारे से गूंज रहा था।

क्रिकेट और स्पोर्ट्स स्पिरिट तब शर्मसार हो गई जब बांग्लादेश क्रिकेट के कप्तान Azizul Hakim Tamim अपने दोनों हाथ उठा कर समर्थकों को नारे लगाने के लिए उकसा रहे थे। दर्शकों की बात तो एक हद तक समझ आती है, लेकिन अगर किसी टीम का कप्तान ही इन चीजों को बढ़ावा दे रहा है तो इसका मतलब यही निकल कर आता है कि साम्प्रदायिक उन्माद और साम्प्रदायिक श्रेष्ठता की भावना ने उस देश के नागरिकों को किस हद तक जकड लिया है, उसे बीमार कर दिया है।

बांग्लादेश क्रिकेट टीम के समर्थकों और टीम के कप्तान का यह जेस्चर न तो स्पोर्ट्स के लिए अच्छा है और न ही मानवता और हमारे समाज के लिए। यह हमारे समाज को आग के कुण्ड में झोंकने का काम कर रहा है। हैरत की बात तो यह है कि जिस साम्प्रदायिक विद्वेष की भावना के तहत विरोधी टीम को चिढाने के लिए ऐसे नारे लगा जा रहे थे, उस टीम का कप्तान (मोहम्मद अमान) ख़ुद एक मुसलमान है।

यह मुसलमान कप्तान उस देश की एक क्रिकेट टीम का कप्तान है जहाँ उसके धर्म को ‘अल्पसंख्यक’ का दर्जा प्राप्त है। इसके विपरीत सामने वाली टीम के अगर नाम देखें जाए तो यह विडम्बना ही कही जाएगी कि वहाँ सिर्फ एक खास धर्म के ही खिलाडियों का जमावड़ा है। विविधता का मुँह चिढ़ाती ऐसी टीम की तरफ से अगर ऐसा आचरण किया जा रहा है तो इसमें कोई अचम्भे की बात नहीं।

साम्प्रदायिक नारों और हिंसा के उदाहरणों से भरा हुआ है क्रिकेट।

दुबई में हुए फाइनल मैच में बांग्लादेशी क्रिकेट टीम के समर्थकों तथा टीम के कप्तान की तरफ से जिस प्रकार का जेस्चर दिखाया गया, वैसी घटनाएं क्रिकेट में लगातार देखने को मिलती रही हैं। यह एक ज़हर है, साम्प्रदायिक उन्माद का ज़हर। पिछले साल 2023 के विश्व कप के दौरान भी दो मामले ऐसे देखे गए जो यह बतलाते हैं कि अगर समाज में साम्प्रदायिकता ने गहरे घर कर लिया है तो वह प्रत्येक क्षेत्र को  दूषित करेगा।

Rohit Sharma breaks silence on viral video of 'Jai Shree Ram' chants for Mohammed Shami in Ahmedabad Test

एक मामले में यह देखा गया कि पाकिस्तानी टीम के खिलाडियों को देख कर भारतीय दर्शकों के एक समूह की तरफ से ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए गए, जबकि दूसरी घटना में भारतीय स्टार गेंदबाज मोहम्मद शमी को देख कर एक भारतीय दर्शक ने ‘जय श्री राम’ का नारा लगाया। यहाँ एक अच्छी बात यह रही कि भारतीय टीम के किसी खिलाडियों ने इसका उस तरह से समर्थन नहीं किया जिस तरह से बांग्लादेश के U-19 टीम के कप्तान Azizul Hakim Tamim ने किया।

U-19 एशिया कप के फाइनल में भी मिली भारतीय क्रिकेट टीम को हार

रविवार, 8 दिसंबर को दुबई में भारत और बांग्लादेश के बीच U-19 एशिया कप का फाइनल मैच खेला गया। इस मैच में भी भारत की U-19 टीम को बांग्लादेश के हाथों बड़ी हार का सामना करना पड़ा। मोहम्मद अमान की कप्तानी में भारतीय टीम ने टॉस जीत कर पहले गेंदबाजी करते हुए बांग्लादेश को महज 198 रनों पर ही रोक दिया। भारत के सामने लक्ष्य बहुत छोटा था लेकिन भारतीय टीम जब बल्लेबाजी करने उतरी तो उसकी शुरुआत अच्छी नहीं रही।

भारतीय टीम के नियमित अन्तराल पर विकेट गिरते रहे और इस तरह से फाइनल मैच में बांग्लादेश ने भारत को 59 रनों से हरा कर एशिया कप का खिताब एक बार फिर से अपने नाम कर लिया।  – पढ़ें Livemint Report

 


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